11 May 2016

Imam Hussain (a) – Zulm ke khilaaf mazboot diwaar




Imam Hussain (a) ek aisi shaksiyat hai jo zulm ke khilaaf ek mazboot diwaar nazar aate hai. Aap (a) ki wiladat hijrat ke baad Madina Munawwara me hui jaha Rasul-e-Akram (s) ne Allah ke Qanun ki bina par ek Ilahi nizaam ka qiyam kiya tha. 

Wo aisa waqt tha jab kuffar-e-Makka Madina par tarah tarah ke zulm kar rahe the aur ek ke baad ek hamle kar rahe the. Apne bachpan me hi Imam Hussain (a) ne apne walid, Imam Ali (a) ko kuffar ke zulm ke khilaaf muqabla karte hue dekha. Jange Badr ho ya Jange Ohad, Khandaq ki jang ho ya phir Khaibar ki jang; yaha tak ki khud Islami Nizaam me maujood galat logo ke khilaaf khade hona. Imam Hussain (a) ko bachpan se yehi dars mila tha ki Zulm kahi bhi ho, uske khilaaf baithna jurm hai aur uske khilaaf qayam ek zaruri amal hai.

3 May 2016

Shia Personal Law Board aur Shia People's Party - Kuch Sawalaat!!


Hindustan me Shia qaum ke representation ka sawal ek aisa sawal hai jiska jawab milna bahot mushkil nazar aata hai. Agar Qaum ke dastawezo, jaise Quraan aur Hadis ki roshni me dekhe to qaum ka rehnuma / leader / rehbar ek Aadil, baizzat aur deen ke jannewale bade aalim-e-deen ko hona chahiye. Lekin kya Hindustani Shia qaum me rehbariyat ke maqam par kaun faez hai?

24 Nov 2015

तकलीद और विलायत-ए-फ़कीह




तकलीद

ग़ैबते इमामे ज़माना (अ) के दौर में अवाम को दीन के अहकाम को उसके हकीकी सूरत में पहुचने के लिए समाज में से कुछ लोगो को खास तौर पर दीनी इल्म हासिल कर के उस मकाम पर पहुचना ज़रूरी है जहाँ पर वो कुरान और हदीस में रिसर्च कर के ज़िन्दगी में पेश आने वाले मसाइल को लोगो के सामने पेश करे ताकि लोग इन अहकामात पर अमल करते हुए अपनी ज़िन्दगी बसर करे और कमियाबी तक पहुंचे.

अस्ल में देखा जाए तो हर इंसान के लिए ज़रूरी है की वो इतना दीनी इल्म हासिल करे जिससे की वो अपनी ज़िन्दगी में पेश आने वाले मसाइल को कुरान और हदीस की रौशनी में हल कर सके. लेकिन हकीक़त की नजरो से दखा जाए तो यह किसी आम इंसान के लिए मुश्किल मरहला है की वो अपने ज़िन्दगी के उमूर भी अंजाम दे और दीन का दकीक इल्म भी हासिल करे. इसलिए बेहतर सूरत समाज के लोगो के लिए यह है की कुछ लोग दीन का इल्म हासिल करने के लिए जद्दो जहद करे और मुजतहिद बने ताकि अवाम अहकामात में इन मुज्तहेदीन को फॉलो करे या उनकी तकलीद करे.

23 Nov 2015

Taqleed aur Wilayat-e-Faqih




Taqleed

Gaibat-e-Imame Zamana ke daur me awaam ko deen ke ahkaam ko uske haqiqi surat me pahuchane ke liye samaj me se kuch logo ko khas taur par deeni ilm hasil kar ke us maqam par pahuchna zaruri hai jaha par wo Quraan aur Hadis me research kar ke zindagi me pesh aane wale masael ko logo ke saamne pesh kare taaki log in ahkamaat par amal karete hue apni zindagi basar kare aur kamiyaabi tak pahuche.

20 Nov 2015

आतंकवाद का बीज बोने वाले अब आतंकवाद की फसल काट रहे हैं : कल्बे जवाद नक्वी

आईएस और अन्य आतंकवादी संगठनों के खिलाफ जुमे की नमाज के बाद आसफि मस्जिद में हुआ प्रदर्शन,उलमा के साथ जनता ने बड़ी संख्या में भाग लिया

लखनऊ 20 नवंबर :आईएस और अन्य आतंकवादी संगठनों द्वारा वैश्विक स्तर पर किये जारहे आतंकवाद के खिलाफ आज मजलिसे उलमाये हिन्द के बेनर तले मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी के नेतृत्व में आसफि मस्जिद पर विरोध प्रदर्शन किया गया ।

प्रर्दषनकारी आईएस और आतंकवाद के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए आसफि मस्जिद से निकल कर रूमी गेट की सड़क तक आए और आतंकवाद के संस्थापकों और फंडिंग करने वालों के खिलाफ विरोध प्रर्दषन किया। ।प्रर्दषनकारियों को संबोधित करते हुए मजलिसे उलमाये हिन्द के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक्वी ने कहा कि दुनिया मै जहां कहीं भी किसी पर अत्याचार हो रहा है हम उस अत्याचार और आतंक के खिलाफ हैं लेकिन मिडिया के मुसलमानों पर लगाए गए सभी आरोपों निराधार हैं कि मुसलमान आतंकवाद के खिलाफ खुलकर अपना रुख व्यक्त नहीं करते हैं।

मौलाना ने कहा कि आतंकवाद का बीज बोने वाले आज खुद आतंकवाद की फसल काट रहे हैं ।आतंकवादियों को हथियार कौन देता है और उन्हें धन कहां से मिलता है? क्या आज तक मिडिया ने इस मुद्दे पर कोई स्टोरी की और ऐसे मुद्दे डिबेट में शामिल किए ?

मौलाना ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पचास देश ऐसे हैं जो आईएस को हथियार देते हैं और सस्ते दामों में उस्से तेल खरीद रहे हैं उसके बाद वही देश आतंकवाद के खाफ हुल्लड़ हंगामा मचाए हुए हैं। मौलाना ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि विश्व शक्तियों ने जो आग मुसलमानों के खिलाफ भड़काई थी अब वह खुद उसकी चपेट में आ चुके हैं।

मौलाना ने कहा कि मीडिया दोहरा गुणवत्ता क्यों साधे हुए है यदि अमेरिका और इजरायल के एक आदमी की भी हत्या कर दी जाती है तो कई दिनों तक डिबेट होती है लेकिन जब अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, बर्मा, सीरिया और अन्य देशों में मुसलमानों विषेश कर शियाओं को मारा जाता हे तो कोई चैनल नहीं दिखाता और न किसी राजनीतिक व धार्मिक नेता की तरफ से निंदा मै बयान आता है। शिया लगातार आतंकवाद का निशाना बनाये जाते रहे है, इमामबाडों और मस्जिदों को आत्मघाती हमलों में उड़ाया गया लेकिन किसी ने निंदा मै बयान जारी नहीं किया ये दोहरी गुणवत्ता क्यों घ् जुल्म किसी भी धर्म के लोगों पर हो, वह निंदनीय है लेकिन जब तक दोहरी गुणवत्ता खत्म नहीं होगी आतंकवाद समाप्त नहीं होगी ।पेरिस में हुए हमले पर मीडिया इतना शोर मचा रहा है मगर शिया लोगों पर पिछले पंद्रह वर्षों से लगातार इराक और सीरिया में आतंकवादी हमले हो रहे हैं आज तक एक डिबेट नहीं हुई।

मौलाना ने कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि भारत के एक मौलाना ने आईएस के समर्थन में बयान दिया, उनके खलीफा बगदादी को पत्र लिखा और भारत के नक्शे के ऊपर आईएस का मानचित्र लगाया उस पर न मीडिया ने कोई बात की और न हमारी सरकारों ने कोई कार्यवाही की ऐसे लोगों पर सरकार सख्ती क्यों नहीं बरत रही हैं जो हमारे देश में रहकर आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।

मौलाना ने कहा कि लगभग सात महीने से यमन में सउदी अरब लगातार बमबारी कर रहा है मगर दुनिया चुप है ।विष्व युद्व में भी इतनी तबाही नहीं हुई जितनी सऊदी हमलों में यमन में हो चुकी है मगर दुनिया तमाशा देख रही है ।फिलसतीन में इसराइल निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रहा है और आतंकवाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है उसके विरुद्ध क्यों निंदा मै बयान नहीं दिए जाते। दुनिया में केवल एक देश ईरान है जो वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध अकेले खड़ा हुआ है और दुनिया आतंकवाद का तमाशा देख रही है।

प्रर्दषन मै मौलाना रजा हुसैन,मौलाना तसनीम मेहंदी, मौलाना षबाहात हुसैन, मौलाना फीरोज हुसैन, मौलाना जव्वार हुसैन, मौलाना सरकार हुसैन मौलाना षबाब हैदर नक्वी और अन्य उलेमा मौजोद रहे।

Imam Hussain (a) – Zulm ke khilaaf mazboot diwaar Imam Hussain (a) – Zulm ke khilaaf mazboot diwaar

Imam Hussain (a) ek aisi shaksiyat hai jo zulm ke khilaaf ek mazboot diwaar nazar aate hai. Aap (a) ki wiladat hijrat ke baad Madi...

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